लड़की चली लन्दन
ह र इंसान का एक सपना होता है .. मेरा भी है, छोटा सा सपना .. पूरी दुनिया की सैर करना .. हाँ - हाँ पता है, इतना भी छोटा सपना नहीं है लेकिन नामुमकिन भी तो नहीं .. ये मैंने जाना जब पहली बार अपने देश से बाहर घूमने निकली. सोलोट्रिप. मम्मी से कहा, ‘मुझे लन्दन जाना है घूमने’ .. मम्मी ने कोई जवाब ही नहीं दिया. उन्हें पता था ये लड़की हर बार कोई नया शगूफा छोड़ देती है. लेकिन कहीं न कहीं उन्हें अंदाज़ा था की एक बार कुछ करने का कहेगी तो करके ही मानेगी. शायद इसीलिए उन्होंने इस बात का जिक्र पापा से किया. अगली ही सुबह पापा का फ़ोन आया और कहने लगे, ‘सुना है तुम विदेश जा रही हो ?’ मैंने कहा, ‘हाँ पापा सोच तो रही हूँ ..’ अगला सवाल था, ‘किसके साथ ..?’ मैंने कहा, ‘अकेले ..’ और मेरी उम्मीदों से एकदम उलट पापा ने कहा, ‘जाओ और खूब एन्जॉय करके आओ. जब तक घूमने से पेट न भरे मत आना.’ मैं हैरान थी .. शायद एक अनमेरिड, इंडीपेंडेंट और सपने देखने वाली लड़कियों के माँ -बाप भी उन्ही की तरह सोचने लगते हैं. उसी वक़्त जोश में आकर मैं लैपटॉप के सामने ...